महर्षि व्यास ने चारों युगों में कलयुग को सर्वश्रेष्ठ युग क्यों कहा है?

महर्षि व्यास ने चारों युगों में कलयुग को सर्वश्रेष्ठ युग क्यों कहा है?

चारों युगों में कलयुग सर्वश्रेष्ठ युग क्यों है? आइए जानते हैं

हम सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म ग्रंथ में समय के कालचक्र को चार युगों में बाटा गया है 

1. सतयुग

2. त्रेता युग

3. द्वापर युग

4. कलियुग

कलयुग को मानव जाति का सबसे श्रापित युग कहा गया है लेकिन दोस्तों आप यह नहीं जानते होंगे कि महर्षि व्यास ने विष्णु पुराण में कलयुग को मानव जाति का सबसे महत्वपूर्ण yug बताया है


चारों युगों में कलयुग सर्वश्रेष्ठ युग क्यों है आइए जानते हैं  हम सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म ग्रंथ में समय के कालचक्र को चार युगों में बाटा गया है   1. सतयुग  2. त्रेता युग  3. द्वापर युग  4. कलियुग  कलयुग को मानव जाति का सबसे श्रापित युग कहा गया है लेकिन दोस्तों आप यह नहीं जानते होंगे कि महर्षि व्यास ने विष्णु पुराण में कलयुग को मानव जाति का सबसे महत्वपूर्ण yug बताया है    दोस्तों विष्णु पुराण में वर्णित कथा के अनुसार 1 दिन महर्षि व्यास नदी में स्नान कर रहे थे तभी वहां पर कुछ ऋषि मुनि पहुंचे और वह महर्षि व्यास को देख रहे थे कि वह नदी के अंदर ध्यान मुद्रा में बैठे हैं इसी कारण वह ऋषि मुनि लोग वृक्ष के नीचे बैठकर महर्षि व्यास जी का इंतजार करने लगे, तभी महर्षि व्यास नदी में ध्यान से उठकर बोले  युगों में कलयुग वर्णों में शूद्र और इंसानों में स्त्री श्रेष्ठ है ऐसा कहने के बाद भी पुनः नदी में ध्यान लगाने के लिए बैठ गए और फिर कुछ देर बाद बाहर निकल कर बोले शूद्र तुम श्रेष्ठ हो, स्त्रियां ही साधु हैं और उनसे ज्यादा इस संसार में धन्य कोई नहीं, गंगा तट पर बैठे साथ होने यह सब सुना तो उन्हें बड़ा आश्चर्य लगा और वह लोग अपने आपस में बात करने लगे और कहने लगे कि हमने सुना है कि युगों में कलयुग सबसे श्रापित Yug hai. और जाति में ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ है तो ऐसा महर्षि व्यास क्यों बोल रहे हैं, फिर जब महर्षि व्यास स्नान करने के बाद ऋषि गढ़ लोगों के सामने आए और उनसे बोला कि आप सभी आकर आकर रहे हैं तो रिसीवर ने उत्तर दिया कि महर्षि व्यास जी हम आपसे मिलने आए थे लेकिन जब आप इस प्लान कर रहे थे तो आपने बोला कलयुग की सर्वश्रेष्ठ है, शूद्र ही श्रेष्ठ है और स्त्रियां साधु या धन्य है ऐसा क्यों है इसका क्या मतलब है आप में समझाएं क्योंकि महर्षि व्यास जी satya ही बोलते हैं    महर्षि व्यास जी हंसे और बोले जो फल सतयुग में 10 वर्ष की तपस्या ब्रह्मचर्य और कठिन पालन करने से मिलता है वह त्रेता युग में 1 वर्ष में द्वापर युग में 1 महीने में और कलयुग में 1 दिन में प्राप्त कर सकता है इस कारण ही कलयुग को मैंने सर्वश्रेष्ठ Yug कहा, कलयुग में थोड़े से परिश्रम से ही महानता की प्राप्ति हो जाती है इसलिए मैं कलयुग को सर्वश्रेष्ठ मानता हूं    शूद्र कैसे श्रेष्ठ है- ब्राह्मणों को पहले ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वेद आदि ग्रंथ पढ़ने होते हैं और फिर स्वधर्म आचरण से अर्चित धन से यज्ञ आदि करना पड़ता है और इसमें भी व्यर्थ का भोजन व्यर्थ का वार्तालाप उनके पतन का कारण बनते हैं इसलिए उनको जितना संयम रखना जरूरी है उतना ही अनुचित क्योंकि इन कामों को सही ढंग से ना करना Dosh ग्रहण करने के समान होता है किंतु जिसे मंत्र हीनं यज्ञ का ही अधिकार है वह शूद्र सेवा मात्र करने से ही सद्बुद्धि को प्राप्त कर लेता है इसीलिए वह अन्य जातियों की अपेक्षा सर्वश्रेष्ठ है    स्त्रियां क्यों साधु या धान्य है आइए बताते हैं पुरुषों अपने कमाए धन को हमेशा दान पुण्य में लगाना चाहिए, और यदि मनुष्य यह Dhan किसी अनुचित कार्य में लगाता है तो उसे कष्ट भोगने पड़ते हैं किंतु पत्नी तन मन धन से अपने पति की सेवा में लगी रहती है और पत्नियों को पति की सेवा करने मात्र से ही कर्म फल की प्राप्ति हो जाती है और कलयुग का यह महत्वपूर्ण है कि मात्र श्री कृष्ण का नाम जपने से ही इंसान का जीवन धन्य हो जाता है


दोस्तों विष्णु पुराण में वर्णित कथा के अनुसार 1 दिन महर्षि व्यास नदी में स्नान कर रहे थे तभी वहां पर कुछ ऋषि मुनि पहुंचे और वह महर्षि व्यास को देख रहे थे कि वह नदी के अंदर ध्यान मुद्रा में बैठे हैं इसी कारण वह ऋषि मुनि लोग वृक्ष के नीचे बैठकर महर्षि व्यास जी का इंतजार करने लगे, तभी महर्षि व्यास नदी में ध्यान से उठकर बोले- युगों में कलयुग, वर्णों में शूद्र और इंसानों में स्त्री श्रेष्ठ है ऐसा कहने के बाद भी पुनः नदी में ध्यान लगाने के लिए बैठ गए और फिर कुछ देर बाद बाहर निकल कर बोले शूद्र तुम श्रेष्ठ हो, स्त्रियां ही साधु हैं और उनसे ज्यादा इस संसार में धन्य कोई नहीं, गंगा तट पर बैठे साथ होने यह सब सुना तो उन्हें बड़ा आश्चर्य लगा और वह लोग अपने आपस में बात करने लगे और कहने लगे कि हमने सुना है कि युगों में कलयुग सबसे श्रापित Yug hai. और जाति में ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ है तो ऐसा महर्षि व्यास क्यों बोल रहे हैं, फिर जब महर्षि व्यास स्नान करने के बाद ऋषि गढ़ लोगों के सामने आए और उनसे बोला कि आप सभी आकर आकर रहे हैं तो रिसीवर ने उत्तर दिया कि महर्षि व्यास जी हम आपसे मिलने आए थे लेकिन जब आप इस प्लान कर रहे थे तो आपने बोला कलयुग की सर्वश्रेष्ठ है, शूद्र ही श्रेष्ठ है और स्त्रियां साधु या धन्य है ऐसा क्यों है इसका क्या मतलब है आप में समझाएं क्योंकि महर्षि व्यास जी satya ही बोलते हैं


महर्षि व्यास जी हंसे और बोले जो फल सतयुग में 10 वर्ष की तपस्या ब्रह्मचर्य और कठिन पालन करने से मिलता है वह त्रेता युग में 1 वर्ष में द्वापर युग में 1 महीने में और कलयुग में 1 दिन में प्राप्त कर सकता है इस कारण ही कलयुग को मैंने सर्वश्रेष्ठ Yug कहा, कलयुग में थोड़े से परिश्रम से ही महानता की प्राप्ति हो जाती है इसलिए मैं कलयुग को सर्वश्रेष्ठ मानता हूं


शूद्र कैसे श्रेष्ठ है- ब्राह्मणों को पहले ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वेद आदि ग्रंथ पढ़ने होते हैं और फिर स्वधर्म आचरण से अर्चित धन से यज्ञ आदि करना पड़ता है और इसमें भी व्यर्थ का भोजन व्यर्थ का वार्तालाप उनके पतन का कारण बनते हैं इसलिए उनको जितना संयम रखना जरूरी है उतना ही अनुचित क्योंकि इन कामों को सही ढंग से ना करना Dosh ग्रहण करने के समान होता है किंतु जिसे मंत्र हीनं यज्ञ का ही अधिकार है वह शूद्र सेवा मात्र करने से ही सद्बुद्धि को प्राप्त कर लेता है इसीलिए वह अन्य जातियों की अपेक्षा सर्वश्रेष्ठ है


स्त्रियां क्यों साधु या धान्य है आइए बताते हैं पुरुषों अपने कमाए धन को हमेशा दान पुण्य में लगाना चाहिए, और यदि मनुष्य यह Dhan किसी अनुचित कार्य में लगाता है तो उसे कष्ट भोगने पड़ते हैं किंतु पत्नी तन मन धन से अपने पति की सेवा में लगी रहती है और पत्नियों को पति की सेवा करने मात्र से ही कर्म फल की प्राप्ति हो जाती है और कलयुग का यह महत्वपूर्ण है कि मात्र श्री कृष्ण का नाम जपने से ही इंसान का जीवन धन्य हो जाता है



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