केतु ग्रह शांति के वैदिक उपाय

केतु ग्रह शांति के वैदिक उपाय

 केतु ग्रह शांति के वैदिक उपाय


केतु ग्रह शांति के वैदिक उपाय


1. केतु शांति के लिए भगवान गणपति को सिंदूर अर्पण, गणपति का पूजन-व्रत तथा इनके स्तोत्र पाठ, मंत्र जाप करना चाहिए । केतु के कोप से केवल गणपति देव की भक्ति ही बचा पाती हैं ।


2.जिन जातकों की कुण्डली में केतु अशुभ फल प्रदायक हो तो  केतु के बीजमंत्र का सवा लाख या 17 हजार की संख्या में जाप करवाना चाहिए ।


केतु का बीजमंत्र - ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः


3.केतु यंत्र की घर में स्थापना भी जातक को लाभ प्रदान करती है।


4. ....


5. केतु से पीड़ित व्यक्ति को कम्बल, लोहे का चाकू, तिल, भूरे रंग के वस्त्र केतु की दशा में दान करने से केतु का दुष्प्रभाव कम होता है। 


6. केतु से सम्बन्धित रत्न लहसुनिया का दान भी उत्तम होता है। 


7.अगर केतु की दशा का नेष्ट फल संतान पर पड़ रहा है तो मंदिर में चितकबरे कम्बल का दान करना चाहिए।


8. काले कपडे मे काले तथा सफेद तिल बांधकर चलते पानी मे प्रवाहित करे ।


9. कुत्तों की सेवा तथा कुत्तो को दूध- चपाती देना, केतु को प्रसन्न करता है ।


10. कुष्ठ आश्रम मे दवाइयां, अनाज तथा वस्त्र का दान अत्यन्त कल्याणकारी है ।


11. ब्राह्मणों को भोजन अथवा दाल-चावल या खिचड़ी खिलायें इससे भी केतु का प्रकोप शांत होगा। 


12. फकीरो की सेवा करें यह केतु को प्रसन्न करता है ।


13. केतु के द्वारा निर्मित अशुभ योग, दशा, तथा मारकेष इत्यादि का सर्वाधिक असरदार उपाय है, बकरे को किसी देवी मंदिर में अर्पण करना । यह उपाय माता की असीम कृपा प्रदान करता हुआ, दिव्य प्रभाव देता है ।


14. केतु का कोप शांत करके शीघ्र ही इनकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए भगवान गणपति के दर्शन, पूजा, तथा गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना अत्यंत लाभदायक है ।


*केतु के निमित्त उपाय:-*


1. दुर्गा या हनुमान की आराधना करें। 

2. कान छिदवाएं। 

3. लाल किताब के अनुसार केतु संतान का कारक हैं इसलिए संतानों से संबंध अच्छे रखें। 

4. भगवान, गणेश की आराधना करें । 

5. दोरंगे कुत्ते की सेवा करे । 

6. कुत्ता पालकर उसकी सेवा करने से केतु प्रसन्न होते है ।

7. तिल, ईमली तथा जौ किसी हनुमान मंदिर में दान करें। 

8. सोते समय सिर के पास किसी पात्र में जल भरकर रखें और सुबह किसी पेड़ में डाल दें। यह प्रयोग 43 दिन करें। 

9. अपने खाने में से प्रथम ग्रास कपिला गाय, कुत्ते तथा कौवे को खिलाये । 

10. पक्षियों को बाजरा खिलाएं। 

11. चींटियों के लिए आटा तथा शक्कर डाले ।


*केतू ग्रह के निमित्त दान का उपयुक्त समय:-*

नवग्रहों मे नवे स्थान पर केतू ग्रह के निमित्त दान, शनिवार को रात्रिकाल मे या रविवार को सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय, अपाहिज या भिखारी को ही करें ।


*दान सामग्री :-*

1.स्लेटी रंग (धूम्र वर्ण) के वस्त्र, लोहा, लहसुनियां, बकरा, काले तिल, सात प्रकार के अनाज, तेल, नारियल, चितकबरा कंबल, चाकू तथा दक्षिणा । कपिला गाय दक्षिणा सहित दान करना केतु शांति के लिए अत्यंत कल्याणकारी दान है ।


*विशेष:-*. केतू के निमित्त दान मे, फकीरों- कुत्तो- तथा अपाहिजो को भोजन करवाना, केतु देव को अंत्यंत प्रिय है ।


*केतु ग्रह द्वारा निर्मित पीङा को दूर करने हेतु विशेष स्नान:-*

बकरी के दूध मे जल मिलाकर, फिर उसमे जंगली सूअर के द्वारा खोदी गई मिट्टी, किसी पर्वत के अग्रभाग की मिट्टी डालकर उस जल को गैडे की खाल के द्वारा निर्मित पात्र की सहायता से स्नान करने से केतु ग्रह द्वारा जनित पीडा दूर होती हैं । 


*केतु ग्रह द्वारा उत्पन्न पीडा को शांत करने के लिए स्नान के जल मे निम्नलिखित औषधियों को मिलाकर स्नान करने से उक्त ग्रह राहत प्राप्त होती हैं:-* 

लाल चंदन, लोबान, तारपीन, गजदन्त, कस्तूरी, तिलपत्र, गंगाजल और छाग-मूत्र मिश्रित जल से स्नान करने से केतु पीड़ा का निवारण हो जाता है ।


*केतु शांति हेतु रत्न धारण*

*केतू रत्न- लहसुनियां, उपरत्न-मार्का, तथा धातु- सीसा*


*रत्न:-* केतु हेतु लहसुनिया रत्न पंचधातु की अंगुठी में विधिवत् धारण करनी चाहिए।


लाभ :-* विधिपूर्वक रत्न धारण करने से भूत-प्रेत बाधा, संतान लाभ, धन मे वृद्धि तथा शत्रु नाश होता है ।


*धारण विधि -*  

लहसुनियां बुधवार को, अश्विनी, मघा, मूल नक्षत्रो मे, रविपुष्य योग मे पंचधातु की अंगूठी मे बनवाकर दाहिने हाथ की कनिष्ठा अंगुली मे धारण करे ।


*वजन -*  

लहसुनियां कम से कम 5 रत्ती का पहने ।

प्राण प्रतिष्ठा - केतू के मंत्र  का कम से कम तीन माला या 7000 मंत्र का जाप करके रत्न धारण करे,


*मंत्र :- ॥ ॐ  स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे  नमः ॥*


मंत्र जाप के उपरांत गणेश जी को प्रसाद चढाये ।

*दान सामग्री:-*  तिल, तेल, कंबल  तथा दक्षिणा ब्राह्मण या गरीब को दान करे ।

संभव हो तो इस दिन व्रत करे । 

दान हेतु वस्तुएं-  लोहा, बकरा, नारियल, तिल, सप्तधान्य, धूम्र वर्ण का वस्त्र, लोहे का चाकू, कपिला गाय दक्षिणा सहित दान करनी चाहिए।


केतु ग्रह की कृपा प्राप्ति तथा प्रसन्नता पाने के लिए उनके मंत्रों का जाप मनुष्यों को अवश्य करना चाहिए । केतु के वेदमंत्र, पुराणोक्त मंत्र, गायत्री मंत्र, बीज मंत्र, लघु मंत्र तथा अर्ध्य मंत्र निम्नलिखित प्रकार से है:-


*केतु मंत्र:-*


*केतु वैदिक मंत्र-* 

*ॐ  केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्य्याऽपेशसे। समुषभ्दिरजायथाः।।*


*केतु पौराणिक मंत्र-* 

*ॐ पलाश पुष्प सकाशं तारका ग्रह मस्तकम्।* 

*रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।*


*केतु तंत्रोक्त मंत्र-* 

*ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।*

जप संख्या- 17000


*केतु गायत्री-1* 

*ॐ पद्म पुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि ।* 

*तन्नो केतु प्रचोदयात्।।*


*केतु गायत्री-2* 

*ॐ धूम्र वर्णाय विदमहे , कपोत वाहनाय धीमहि ।*

*तन्नो केतूः प्रचोदयात ॥*


*वैदिक मंत्र- ॐ  केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्य्याऽपेशसे। समुषभ्दिरजायथाः।।*


*पौराणिक मंत्र:-* 

*ॐ पलाश पुष्प सकाशं तारका ग्रह मस्तकम्।*

*रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।*


*तंत्रोक्त मंत्र- ॐ स्रां, स्रीं, स्रौं, सः केतवे नमः।*


*केतु गायत्री:-*

*ॐ पद्म पुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि ।*

*तन्नो केतु प्रचोदयात्।।*


*II केतुकवचम् II*

*अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमंत्रस्य त्र्यंबक ऋषिः I* 

*अनुष्टप् छन्दः I केतुर्देवता I कं बीजं Iनमः शक्तिःI*

*केतुरिति कीलकम् I केतुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः II*


*केतु करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् I*

*प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् II १ II*


*चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः I* 

*पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः II २ II* 


*घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः I* 

*पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः II ३ II*


*हस्तौ पातु श्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः I*

*सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः II ४ II* 


*ऊरुं पातु महाशीर्षो जानुनी मेSतिकोपनः I* 

*पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः II ५ II* 


*य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम् I* 

*सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयि भवेत् II ६ II* 


*II इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे केतुकवचं संपूर्णं II*



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