योग की कुछ प्रमुख मुद्राएं के लाभ और विधि! Yoga Ki Mudraye ke labh Thenewsbulletin

योग की कुछ प्रमुख मुद्राएं के लाभ और विधि! Yoga Ki Mudraye ke labh Thenewsbulletin

योग की कुछ उपयोगी मुद्राएँ

पातः स्नानादि से निवृत्त हो के आसन बिछाकर पद्मासन अथवा सुखासन में बैठो। पाँच-दस गहरे साँस लो और धीरे-धीरे छोड़ो।

उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करो। विशेष आवश्यक परिस्थिति में इन्हें कभी भी कर सकते हो।


ज्ञान मुद्रा

कुछ उपयोगी मुद्राएँ  पातः स्नानादि से निवृत्त हो के आसन बिछाकर पद्मासन अथवा सुखासन में बैठो। पाँच-दस गहरे साँस लो और धीरे-धीरे छोड़ो।  उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करो। विशेष आवश्यक परिस्थिति में इन्हें कभी भी कर सकते हो।


लाभ : मानसिक रोग जैसे कि अनिद्रा अथवा अतिनिद्रा, कमजोर यादशक्ति, क्रोधी स्वभाव आदि हो तो यह मुद्रा अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगी।

यह मुद्रा करने से पूजा-पाठ, ध्यान-भजन में मन लगता है। इस मुद्रा का अभ्यास प्रतिदिन 30 मिनट करना चाहिए।

विधि : तर्जनी अर्थात् प्रथम उँगली को अँगूठे के नुकीले भाग पर स्पर्श कराओ। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें


लिंग मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ : शरीर में उष्णता बढ़ती है, खाँसी मिटती है और कफ का नाश होता है।

विधि : दोनों हाथों की उँगलियाँ परस्पर भींचकर अंदर की ओर रहे हुए अंगूठे को ऊपर की ओर सीधा खड़ा रखो


शून्य मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ : यह मुद्रा करने से कान का दर्द मिट जाता है। कान में से पस निकलता हो अथवा बहरापन हो तो यह मुद्रा ४ से ५ मिनट तक करनी चाहिए।

विधि : सबसे लम्बी उँगली (मध्यमा) को अंदर की ओर मोड़कर अंगूठे के मूल में लगायें और अंगूठे से हल्का-सा दबायें । शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें।


सूर्य मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ : शरीर में एकत्रित अनावश्यक चर्बी

और स्थूलता को दूर करने के लिए यह एक उत्तम मुद्रा है।

विधि : अनामिका अर्थात् सबसे छोटी उँगली के पासवाली उँगली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगायें और अँगूठे से हल्का-सा दबायें। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें।


प्राण मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ : यह मुद्रा प्राणशक्ति का केन्द्र है। इससे शरीर निरोगी रहता है। आँखों के रोग मिटाने के लिए व चश्मे के नम्बर घटाने के लिए यह मुद्रा अत्यंत लाभदायक है।

विधि : कनिष्ठिका, अनामिका और अंगूठे के ऊपरी भागों को परस्पर एक साथ स्पर्श कराओ। शेष दो उँगलियाँ सीधी रहें।


वायु मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ: हाथ-पैर के जोड़ों में दर्द, लकवा, पक्षाघात, हिस्टीरिया आदिरोगों मेंलाभ होता है । इस मुद्रा के साथ प्राण मुद्रा करने से शीघ्र लाभ होता है।

विधि : तर्जनी अर्थात् प्रथम उँगली को मोड़कर अँगूठे के मूल में लगायें और अँगूठे से हल्का-सा दबायें। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें


अपानवायु मुद्रा

योग मुद्राएं के लाभ और विधि:


लाभ : हृदयरोगों जैसे कि हृदय की घबराहट, हृदय की तीव्र या मंद गति, हृदय का धीरे-धीरे बैठ जाना आदि में थोड़े ही समय में लाभ होता है। अगर किसीको हृदयाघात (हार्ट अटैक) आये या हृदय में अचानक पीड़ा होने लगे, तब तुरंत ही यह मुद्रा करने से हृदयाघात को भी रोका जा सकता है।

पेट की गैस, मेद की वृद्धि और हृदय तथा पूरे शरीर की बेचैनी इस मुद्रा के अभ्यास से दूर होती है आवश्यकतानुसार हररोज २० से ३० मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है।

विधि : अँगूठे के पासवाली पहली उँगली को अँगूठे के मूल में लगाकर अंगूठे के अग्रभाग को बीच की दोनों उँगलियों के अग्रभाग के साथ मिलाकर सबसे छोटी उँगली (कनिष्ठिका) को अलग से सीधी रखें । इस स्थिति को अपानवायु मुद्रा कहते हैं।



 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ