आखिर मंत्र पढ़ने से याददास्त कैसे बड़ती है ? क्या है वैज्ञानिक आधार ?

आखिर मंत्र पढ़ने से याददास्त कैसे बड़ती है ? क्या है वैज्ञानिक आधार ?

आखिर मंत्र पढ़ने से याददास्त कैसे बड़ती है ? क्या है वैज्ञानिक आधार ? 


मंत्रो का विज्ञान बहुत गहरा है । यह उसी प्रकार गहरा है जैसे पृथ्वी पर समुद्र और आसमान में अंतरिक्ष की गहराई का कोई छोर नहीं है । मंत्र अनुभव और अभ्यास से फल देता है । जैसे आप समुद्र में गोता लगाना चाहते हैं लेकिन डूबने का डर है । जैसे-जैसे आपको तैरने का अभ्यास हो जाता है तो आपके लिए गोता लगाना आसान हो जाता है । वैसे ही जब आपको मंत्रो की विधि का  अभ्यास हो जाता है तो जो चाहे वो कर सकते हो । 


अब आपको एक वैज्ञानिक उदाहरण से समझाता हूँ । जब आप गहरा कूआ खोदते हो तो आपको सिर्फ गड्डा ही दिखाई देता है । लेकिन धीरे-धीरे और नीचे जाते हैं तो चारों तरफ से पानी अपने प्रैशर से उस कुए में आना शुरू हो जाता है । तथा पानी का श्रोत उस कुए के साथ लिंक बना लेता है । और बहुत दूर-दूर के श्रोत उस कुए से मिल जाते हैं । 


ऐसे ही जब आप अपने मस्तिक को मंत्रो का कूआ बना लेते हो तो अंतरिक्ष से चारो तरफ से ऊर्जा के श्रोत आपके मस्तिक से जुड़ जाते हैं । आपके मस्तिक की हार्ड डिस्क बड़ी हो जाती है । और आपके पास ऊर्जा का भंडार हो जाता है । चारों तरफ से आने वाली ऊर्जा आपकी याददास्त को बड़ा देती है । और यह याददास्त पुनर्जन्म में भी संचित रहती है । इसलिए ऋषि मुनि अपने पुनर्जन्म के रहश्य को जानते थे । 


इस लिए मंत्रो का अभ्यास करना चाहिए तथा अपने दिमाग की हार्ड डिस्क को बड़ा करना चाहिए तथा दिमाग में  ऊर्जा का भडार एकत्रित करना चाहिए ।


 

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