चीन के कब्जे में नेपाल का यह गांव, वामी ओली सरकार छिपा रही मुद्दा!

चीन के कब्जे में नेपाल का यह गांव, वामी ओली सरकार छिपा रही मुद्दा!

ऐसा कोई सगा नहीं जिसे चीन ने ठगा नहीं एक बार फिर इस कहावत को चीन ने सार्थक कर दिखाया है चीन के साथ गलवहीया करने वाली नेपाल सरकार को तगड़ा झटका लगा है चीन ने नेपाल के रुई गांव पर पिछले 3 साल से कब्जा कर रखा है लेकिन नेपाल की ओली सरकार भारत विरोधी एजेंडा चला रही है उसने इस मामले में अब तक चुप्पी साधे बैठी है
चीन के कब्जे में नेपाल का यह गांव, वामी ओली सरकार छिपा रही मुद्दा!

चीन के साथ गलवहीया कर रही नेपाल सरकार ने अपनी जनता को इस मामले में अब तक गुमराह कर रखा है और चीन के बहकावे में भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने की तैयारी कर रखा है यानी कि अब 60 साल तक नेपाल सरकार के अधीन रहने वाले रुई गांव अब चीन के हिस्से में आ गया है इस मुद्दे को अपनी जनता से छुपाने के लिए नेपाल की कम्युनिस्ट ओली सरकार ने भारत के खिलाफ कालापानी लिपुलेख और लीपूधूरा क्षेत्र को हवा देकर रोई गांव के चीनी कब्जे में चली जाने की आवाज को दबा रही है

नेपाल का यह रुई गांव अब चीन के तिब्बत क्षेत्र के अंतर आ गया है सरकार की घोर लापरवाही और कुछ अधिकारी की उदासीलता की वजह से 72 घरों वाले इस गांव में चीन ने घुसपैठ करते हुए कब्जा कर लिया है हालांकि अभी भी रूई गांव नेपाल के मानचित्र में शामिल है लेकिन वहां पर पूरी तरह से चीन का नियंत्रण है

यहां की सीमा स्तंभों को अतिक्रमण को वैध बनाने के लिए हटा दिया गया है वही इस मुद्दे पर नेपाल की इतिहासकार का कहना है साल 2017 तक रुई और तेइगा गांव देश के गोरखा जिले के उत्तरी भाग में थे रुई गांव नेपाल का हिस्सा है ना ही इसे हमने युद्ध में खोया और ना ही यह तिब्बत से संबंधित किसी विशेष समझौते या अनुबंध के अधीन था नेपाल के बॉर्डर के पिलर को लगाते समय लापरवाही की गई जिसके कारण हमने रुई और तेघा दोनों गांव को दिए 

नेपाल की बामी ओली सरकार भारत के खिलाफ एजेंडा चीन के शह में रहकर कर रही है और चीन के दबाव में ही नेपाल ने हजारों साल पुरानी अपनी दोस्ती को दांव पर लगा दिया है लेकिन सच्चाई यह है कि वह वामी ओली सरकार अपनी सच्ची जमीन को खोकर चुप है और भारत की भूमि के लिए रो गा रही है 

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