India और nepal कौन है 'कालापानी' का हकदार , जाने क्या है इतिहास?

India और nepal कौन है 'कालापानी' का हकदार , जाने क्या है इतिहास?

India और nepal कौन है 'कालापानी' का हकदार
हाल ही में नेपाल सरकार ने एक नया राजनैतिक नक्शा जारी किया है जिसमें उसने भारत के काला पानी और लिपुलेख लिंपियाधूरा को भी शामिल किया है जिसका नेपाल की रहने वाली बॉलीवुड की अभिनेत्री मनीषा ने भी समर्थन किया है

आपको बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा भारतीय क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाने तक ही नहीं रुके उन्होंने नेपाल में फैल रहे कोरोनावायरस का जिम्मेदार भी भारत को ठहरा दिया है और कहां-
नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण भारत की वजह से फैला है और यह चीन व इटली से भी ज्यादा घातक है नेपाल के कुछ स्थानीय नेताओं ने बिना जांच के गैरकानूनी तरीकों से भारत के लोगों को नेपाल आने दिया और ऐसे लोगों से नेपाल में corona संक्रमण फैल गया
हालांकि नेपाल की इन हरकतों का भारत ने विरोध किया है और जवाब भी दे दिया है लेकिन सवाल यह है कि पड़ोसी देश नेपाल का रवैया अचानक से क्यों बिगड़ गया कहां जा रहा है कि इसके पीछे 8 मई को भारत द्वारा उत्तराखंड के लिपुलेख जिसे नेपाल अपना हिस्सा कहता है वहां से मानसरोवर के लिए सड़क उद्घाटन की नाराजगी की मुख्य वजह है जिसका नेपाल ने कड़ा विरोध किया था

वहीं कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि नेपाल को भड़काने के पीछे चीन का हाथ है मगर नेपाल के इस रवैया ने सबके मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि आखिर इसमें कितनी सच्चाई है दरअसल भारत और नेपाल का यह विवाद आज का नहीं बल्कि वर्षों से चला आ रहा है

कालापानी विवाद क्या है ?
भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपना अभिन्न अंग कहते हैं भारत के आता है कि कालापानी उत्तराखंड के जिले का भाग है उधर नेपाल कहता है कि यह हमारा हिस्सा है यह क्षेत्र 1962 से indo-tibetan के पास है साल 1816 में नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के सुगौली समझौता हुआ था इसमें काला पानी इलाके से होकर बहने वाली महाकाली नदी भारत नेपाल की सीमा मानी गई है हालांकि सर्वे करने वाले ब्रिटिश ऑफिसर ने बाद में नदी का उद्गम स्थल भी चिन्हित कर दिया था जिसमें कई स्थलों पर सहायक नदियां भी मिलती हैं

नेपाल का दावा है कि विवादित क्षेत्र के पश्चिमी क्षेत्र से गुजरने वाली जलधारा ही वास्तविक नदी है इसलिए काला पानी नेपाल के इलाके में आता है वहीं भारत नदी का अलग उद्गम स्थल अपनी तरफ बताते हुए इस पर अपना दावा करता है

साल 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी की अपनी पहली नेपाल यात्रा में काला पानी विवाद पर चर्चा हुई थी 7 साल बाद इस मुद्दे को उठाया गया था लेकिन अब तक इस मुद्दे को सुलझाया नहीं जा सका है

इतिहास क्या कहता है
मूल तौर पर काला पानी नेपाल की पश्चिमी सीमाओं में आता है 1815 में जब ब्रिटिश सेनाओं का युद्ध जब गोरखाओ से हुआ था तो उन्होंने यह इलाका जीत लिया था इसके बाद यह भारतीय मूल का हिस्सा बन गया था उस समय ब्रिटिश सरकार और नेपाल के बीच सुगौली समझौता हुआ था जिसमें नेपाल के राजा ने यह इलाका ब्रिटिश भारत को सौंप दिया था

मकर नेपाल का दावा है कि कालापानी, लिपुलेख को उसने ईस्ट इंडिया कंपनी से हासिल किया था यहां वह 1961 की जनगणना भी करा चुका है तब भारत ने कोई आपत्ति नहीं की थी

भारत के लिए क्यों जरूरी है काला पानी
कालापानी एक तरह से डोकलाम की तरह है जहां तीन बॉर्डर हैं ऐसे में सैन्य नजरिए से यह ट्रांजैक्शन बहुत जरूरी है उस क्षेत्र में सबसे ऊंची जगह है यह, 1962 युद्ध में भारतीय सेना यहां पर थी एक्सपर्ट बताते हैं कि चीन ने भी इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा हमले नहीं किए थे क्योंकि भारतीय सेना यहां मजबूत स्थिति में थी इस युद्ध के बाद जब भारत में वहां अपनी पोस्ट बनाई तो नेपाल का कोई विरोध नहीं था यह अलग बात है कि उस वक्त भारत और नेपाल के संबंध भी अब जैसे तनावपूर्ण नहीं थे

भारत का यह डर है कि अगर वह इस पोस्ट को छोड़ता है तो हो सकता है कि चीन वहां पर आ जाए और इस स्थिति में इंडिया को केवल नुकसान हासिल होगा इन्हीं सब के कारण भारत उस पोस्ट को छोड़ना नहीं चाहता है लेकिन कालापानी पर नेपाल हमेशा से दावा करता रहा है कालापानी क्षेत्र में महाकाली नदी का बहुत महत्वपूर्ण रोल है नदी बॉर्डर में थोड़ी बहुत अपना रास्ता बदलती रहती है जिसके कारण बॉर्डर पर भी थोड़ा बहुत हलचल होती रहती है


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