coronavirus से लड़ने के लिए इतना पैसा कहां से आ रहा है

coronavirus से लड़ने के लिए इतना पैसा कहां से आ रहा है


  • दुनिया के अमीर देश.. कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए काफी ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं  लेकिन इतना सारा पैसा कहां से आ रहा हैं 'कर्ज के जरिए' सरकारे उधार लेकर यह धन जूटाएंगी.


सरकारें इसके लिए बॉन्ड बेचकर पैसे उधार लेती हैं बॉन्ड देनदार और लेनदार के बीच एक तरह की अनुबंध होते हैं उधार लेने वाले व्यक्ति को अनुबंध के मुताबिक तय की गई तारीख पर पैसा वापस लौटाना होता है लेकिन इससे पहले छोटी से छोटी किस्तों में ब्याज देना होता है

यह बॉन्ड वित्तीय बाजारों में बैंकों और निवेशकों की ओर से खरीदी और बेचें जाते हैं लेकिन वह पैसा वापस कैसे किया जाए सामान्य: सरकार टैक्स से हासिल किए गए धन से कर्ज लौटाती है ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्स की दरों में बढ़त हो सकती है या सरकार इस कर्ज को चुकाने के लिए अपने खर्च सीमित कर सकती है लेकिन इसमें केंद्रीय बैंकों की भी भूमिका होगी केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंक से अलग होते हैं केंद्रीय बैंक देश की सरकार को सेवाएं देते हुए देश की आपूर्ति, ब्याज दरें और कमर्शियल बैंकिंग सिस्टम का ध्यान रखते हैं

कई बार केंद्रीय बैंक सरकारी बॉन्ड समेत कई अन्य संपत्तियां खरीदते हैं वह इन संपत्तियों को खरीदने के लिए एक क्लिक करके पैसा बनाते हैं इसे क्वांटेटिव ईजिंग कहते हैं अगर केंद्रीय बैंक कुछ सरकारी बॉन्ड खरीदने को तैयार हो जाए तो सरकारें अपनी जरूरत के मुताबिक बॉन्ड बेच सकती है

केंद्रीय बैंकों को बॉन्ड बेच कर कर्ज लेने की स्थिति में सरकार देय तिथि आने पर कर्ज चुकाने से बच सकती है कई केंद्रीय बैंक पहले ही यह कह चुके हैं कि वह कोरोना संकट से निपटने के लिए इस व्यवस्था का सहारा लेंगे

क्वांटेटिव ईजिंग को अक्सर नए नोट छापने की नजर से देखा जाता है लेकिन असल में ऐसा नहीं होता हैं और यह नया पैसा सिर्फ बैंक खातों में बढ़ता है कुछ अर्थशास्त्री इसे लेकर चिंता जताते हैं कि इससे चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं अगर पैसों की आपूर्ति असल में तेज होती है इससे इनफ्लेक्शन में बढ़त होती है क्वांटेटिव ईजिंग से अब तक ऐसा नहीं हुआ है लेकिन यह संभव है

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