आखिर क्यों हलाल सर्टिफिकेट के बाद, मांग उठी धार्मिक सर्टिफिकेट की

आखिर क्यों हलाल सर्टिफिकेट के बाद, मांग उठी धार्मिक सर्टिफिकेट की

सिर्फ भारत देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया corona संकट से जूझ रही है हर देश कोशिश कर रहा है किसी ना किसी तरीके से अपने देश को बचाया जा सके लेकिन इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो corona वायरस को छोड़ किसी और पर चर्चा कर रहे हैं
Halal ka matlab


दरअसल ट्विटर पर बुधवार को काफी समय तक धार्मिक सर्टिफाइड ट्रेंड करता रहा लेकिन आप सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर यह है क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ी

हलाल सर्टिफाइड की तर्ज पर धार्मिक सर्टिफाइड 
कुछ लोग धार्मिक सर्टिफिकेट कि अभियान चलाकर सरकार से मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से हलाल सर्टिफाइड चीजों को देश में कई सालों से मदद मिल रही है वैसे ही अलग धर्म के लिए भी शाकाहारी और सात्विक खाने को भी मान्यता मिलनी चाहिए इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए वकील इस करण सिंह भंडारी ने खूब जोर दिया है और साथ ही दावा किया है कि मुहिम शुरू होने के कुछ ही समय बाद कई लोगों ने आवेदन पर दस्तखत भी किए

हलाल क्या होता है
हलाल एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है 'जायज' भारत में हलाल को अक्सर नॉनवेज चीजों के साथ जोड़कर देखा जाता है इस्लाम के मुताबिक जो चीज इस्लामिक आधार के मुताबिक हो उसे हलाल कहा जाता है और जो चीज इस्लामिक नियमों के खिलाफ हो उसे हराम कहते हैं और जब हलाल सर्टिफिकेशन की बात आती है तो सारी बात धरी की धरी रह जाती है

हलाल सर्टिफिकेशन क्या है
हलाल सर्टिफिकेट ऐसे प्रोडक्ट को दीया जाता है जिसे बनाने में किसी जानवर, अल्कोहल या केमिकल का इस्तेमाल ना किया गया हो इसके अलावा इन चीजों में एनिमल fat या कीड़ों तथा दूध से बनी चीजों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता यानी कि जिनको हलाल सर्टिफिकेशन होता है वह पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी है भारत में भी हलाल सर्टिफिकेट के कई जरिए है जो सिर्फ मोहर लगाने के लिए एक मोटी रकम वसूलते हैं भारत में गुजरात में 300 से अधिक ऐसी कंपनियां है जो हलाल सर्टिफाइड हैं

बड़ी हस्तियों का मिला समर्थन
इस मुहिम के समर्थकों की दलील है कि मुसलमानों की तरह और भी सभी धर्मों के लोगों को अधिकार है कि वह अपने पसंद का खाना खरीद सकें सबसे बड़ी बात तो यह है इस मुहिम कि इसका समर्थन कई बड़े नेता भी कर रहे हैं

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