Coronavirus: क्या कोरोना से बढ़ेगी भारत की गरीबी?

Coronavirus: क्या कोरोना से बढ़ेगी भारत की गरीबी?

Corona से गरीबी की और भारत

Corona से गरीबी की और भारत

1.lockdown पर भारत का गहरा असर
2. बढ़ सकती है गरीबों की संख्या
3. 10 साल पीछे चला जाएगा देश
4. रिसर्च में हुए कई खुलासे

Corona  के बढ़ते प्रकोप और उसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए देश में lockdown को और बढ़ाया गया है जिसके बाद आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए सरकार हरसंभव कदम भी उठा रही है लेकिन इसके बाद भी कुछ संकेत ऐसे मिले है

 यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च किया है रिसर्च के अनुसार अगर corona सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंचता है तो भारत में 104 मिलियन यानी कि 10.4 करोड़ लोग गरीब पैदा हो जाएंगे unu ने विश्व बैंक द्वारा तय गरीबी मार्को के आधार पर आकलन किया है

बढ़ेगी गरीबों की संख्या

भारत में गरीबी रेखा के नीचे कितने लोग है इसका रिसर्च में भी जिक्र किया गया है रिसर्च के मुताबिक विश्व बैंक के आय मार्को के अनुसार भारत में अब भी करीब 81.2 करोड लोग गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं यह देश के कुल आबादी का 60 फ़ीसदी है और अगर महामारी व लाकडाउन बढ़ता है तो देश के आर्थिक हालातों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा इससे गरीबों की संख्या बढ़कर 91.5 करोड़ हो जाएगी और यह कुल आबादी का 68 फ़ीसदी हिस्सा होगा

10 साल पीछे चला जाएगा भारत देश

बीते एक दशक में भारत ने आगे आने के लिए कई काम किए और मेहनत सफल भी हुई लेकिन अगर कोरोना लाकडाऊन और आगे बढ़ाया गया  तो भारत द्वारा की गई 10 साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और गरीबों की संख्या बढ़ेगी जिससे देश 10 साल पीछे चला जाएगा

श्रमिकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने इस महीने की शुरुआत में भारत मे एक रिपोर्ट जारी की थी कोरोना संकट के कारण 40 करोड़ से ज्यादा काम कार और गरीब हो जाएंगे और लाक डाउन के कारण सबसे ज्यादा असर इन्हीं काम कारों पर पड़ेगा यदि इसका अनुमान सही रहता है तो असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ेगी, भुकमारी बढ़ेगी 

लोअर मिडिल आय वर्ग में भारत

विश्व बैंक ने आय के आधार पर देशों को चार भागों में बांटा है और भारत को लोअर मिडिल आय वर्ग में रखा है इन देशों में 3.2 डॉलर रोजाना यानी कि ₹78000 सालाना से कम कमाने वाले गरीबी रेखा से नीचे माने जाते हैं

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