Coronavirus कि कोई medicine नहीं, फिर भी लोग कैसे ठीक हो रहे हैं

Coronavirus कि कोई medicine नहीं, फिर भी लोग कैसे ठीक हो रहे हैं

Coronavirus की दुनिया में मेडिसिन नहीं फिर भी लोग ठीक कैसे हो रहे हैं


Coronavirus से संक्रमित 93 साल का एक शख्स का इलाज केरल में किया गया और अब वह corona टेस्ट में नेगेटिव पाए गए हैं उनकी 88 साल की पत्नी भी corona संक्रमित पाए जाने के बाद अब ठीक हो चुकी है यह पहला मामला नहीं है कि जब उम्रदराज लोगों को corona संक्रमित से बचाया गया हो.

विश्व स्वास्थ्य संगठन W.H.O. के मुताबिक संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जिनकी उम्र 60 साल या उससे अधिक है W.H.O. यह मुताबिक दुनियाभर के 204 देश corona संक्रमण की चपेट में है 8 लाख से ज्यादा लोग corona वायरस के संक्रमित हैं और अब तक 42000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है अब तक डेढ़ लाख लोगों का इलाज भी किया जा चुका है भारत में अब तक दो हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मामले सामने आ चुके हैं

अब सवाल यह उठता है कि दुनिया में coronavirus की मेडिसिन हीं बनी है लेकिन लोग ठीक कैसे हो रहे हैं corona virus के इलाज को लेकर विश्व स्वास्थ संगठन का कहना है कि अभी तक इसकी कोई दवा उपलब्ध नहीं है दवा बनाने के लिए बहुत सारे देश लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल जो लोग वायरस संक्रमित अस्पतालों में भर्ती हैं उनका इलाज लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है corona संक्रमित इलाज के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर ने भी गाइडलाइंस जारी की है उनके मुताबिक अलग-अलग लक्षणों वाले इलाज के लिए अलग-अलग ट्रीटमेंट बताए गए हैं और दवाओं की मात्रा के लिए भी सख्त निर्देश दिए गए हैं

साधारण सर्दी खांसी जुकाम बुखार आने पर मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं भी पड़ती है और उन्हें दवाएं देकर इलाज जारी भी रखा जा सकता है लेकिन जिन लोगों को निमोनिया या गंभीर निमोनिया हो तो सांस लेने में परेशानी किडनी या दिल की बीमारी हो या फिर कोई भी ऐसी समस्या जिससे जान जाने का खतरा हो तो उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करने वह इलाज करने के निर्देश है

दवाओं की मात्रा और कौन सी दवा किस मरीज तक इस्तेमाल की जा सकती है इसके लिए भी सख्त निर्देश दिए गए हैं डॉक्टर किसी भी मरीज को अपने मन मुताबिक दवाएं नहीं दे सकते, अस्पतालों में जो मरीज भर्ती हो रहे हैं उन्हें लक्षणों के आधार पर दवाई दी जा रही है और उनका इम्यून सिस्टम भी वायरस से लड़ने में सहायता करता है अस्पताल में मरीजों को आइसोलेट करके रखा जाता है ताकि उनके जरिए किसी और तक यह वायरस ना फैले.

गंभीर लोगों की वजह से वायरस से निमोनिया बढ़ सकता है फेफड़ों में जलन जैसी समस्याएं भी हो सकती है ऐसे में मरीज को सांस लेने में परेशानी हो सकती है बेहद गंभीर वाले मरीजों को ऑक्सीजन वाले सांस लगाए जाते हैं और हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत होगी

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