Arnab goswami से 12 घंटे पूछताछ पर जानिए, किस पत्रकार ने क्या कहा?

Arnab goswami से 12 घंटे पूछताछ पर जानिए, किस पत्रकार ने क्या कहा?

क्या देश के कुछ हिस्से पर प्रेस की आजादी में कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है क्या पत्रकारों की आवाज दबाने का षडयंत्र हो रहा है और इसके लिए सरकारी कानूनी दांवपेच का इस्तेमाल किया जा रहा है यह सवाल इसलिए क्योंकि कल रिपब्लिक भारत के संपादक अर्नब गोस्वामी से जिस तरह से मुंबई पुलिस ने पूछताछ की उसने इन सवालों को जन्म दे दिया है

दरअसल arnab गोस्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित टिप्पणी की है जिसके खिलाफ देशभर के कई इलाके में केस दर्ज किए गए हैं इसी के तहत मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी से लगभग 12 घंटे तक पूछताछ की. अब यह समझ से परे है कि इस मामले में पुलिस ने 12 घंटे तक Arnab से क्या पूछताछ की, मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब राजनीति भी शुरू हो गई है BJP ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकारों के इशारे पर police अर्नब गोस्वामी को परेशान कर रही है

Bjp प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट में लिखा-
क्या गुनाह है भाई जिसके लिए 5-7 घंटे से पूछताछ चल रही है एक सवाल क्या पूछ लिया सोनिया जी से कांग्रेसी इस तरह हैरेसमेंट में उतर आई, इतनी पूछताछ तो देश के स्कैम के सरदारों से नहीं हुई  अगले ही टूट में संबित पात्रा ने लिखा- इतनी पूछताछ अगर पालघर वाले मामले में की होती तो अभी तक संतो के हत्या के पीछे की गई साजिश उजागर हो जाती

इस मामले में ना सिर्फ राजनेताओं बल्कि पत्रकारों ने भी चिंता जाहिर की है और पत्रकारों के साथ इस तरह के बर्ताव के लिए इशारों इशारों में कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और उन पत्रकारों को भी सचेत किया जा रहा है जो इस वक्त चुप्पी साध कर बैठे हैं

टीवी पत्रकार रोहित सरदाना ने ट्वीट करके लिखा- किसी पत्रकार के विचार या प्रस्तुति करने के तरीके आपको नापसंद हो सकते हैं लेकिन अदालती कार्रवाई के बावजूद अगर आप उसके खिलाफ पुलिसिया तंत्र के बेजा इस्तेमाल पर अपनी चुप्पी का पर्दा डालते हैं तो यही लोग कल आपके घर भी आएंगे

टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने भी इस मामले पर ट्वीट करके लिखा- अगली बारी उन सब की हो सकती है जो आज  चुप हैं पुलिस तंत्र का किसी भी पत्रकार पर बेजा इस्तेमाल शक पैदा करता है कि आप उसकी सोच और प्रस्तुति के आगे जाकर उसके खिलाफ प्रतिशोध से ग्रस्त हैं कानून से ऊपर कोई नहीं लेकिन कानून का मजा चखांने का अंदाज दायरा लांग रहा है पूरा सच आना चाहिए

अनुराग मुस्कान ने भी इस मामले पर ट्वीट किया- उन्होंने लिखा कि लगता है महाराष्ट्र में अभिव्यक्ति की आजादी corona हो गया है

इस मामले पर टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया ने राज्य सरकार पर कटघरे में खड़ा करते हुए हुए ट्वीट किया- ओपन टेलीविजन डिबेट की एक टिप्पणी पर अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे पूछताछ वही पालघर में संतों से क्रूर और बर्बर तरीके से हत्या को अपवाह बताकर मामले को रफा-दफा किया गया यह साबित करता है कि देश के सबसे काबिल मे से एक महाराष्ट्र पुलिस के गले पर एक राजनैतिक पट्टा है

इस मामले पर राजदीप सरदेसाई का भी ट्वीट आया उन्होंने लिखा कि क्या एक टीवी कार्यक्रम के लिए मुंबई पुलिस को अर्नब गोस्वामी से पूछताछ करने के लिए वास्तव में 10 घंटे की जरूरत है उनके पास पत्रकारिता के लिए कोई समय ही नहीं बचा है लेकिन यह राज्य शक्ति का गलत उपयोग है

दरअसल एक टीवी कार्यक्रम के दौरान पालघर हिंसा को लेकर सोनिया गांधी के खिलाफ कथित टिप्पणी करने पर वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कई कांग्रेसी शासित राज्यों में कांग्रेसी नेताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी इसी मामले में मुंबई पुलिस ने अरनव गोस्वामी को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन जिस तरह पत्रकार को 12 घंटे तक थाने में बैठा कर रखा गया यह साफ दिखा रहा है यह बदले की भावना के तहत की जाने वाली कार्यवाही है और प्रेस की आजादी के साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी पर भी आघात है मामला अदालत में है और पुलिस को उस में वैसे ही पेश आना चाहिए जैसे मैं दूसरे मामले में पेश आती है

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ