ज्योतिरादित्य सिंधिया का इस्तीफा, कांग्रेस छोड़ने की वजह क्या है

ज्योतिरादित्य सिंधिया का इस्तीफा, कांग्रेस छोड़ने की वजह क्या है

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में 10 बातें


Congrees पार्टी के महासचिव और युवा नेताओं में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के ठीक 1 दिन पहले party से इस्तीफा दे दिया इसके बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल छा गए हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही करीब 20 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया है इधर कांग्रेस ने तुरंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निकालने का आदेश जारी कर दिया है इससे पहले मंगलवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी ज्योतिरादित्य सिंधिया बीते 18 सालों से कांग्रेस के साथ रहेंगे उनके पिता माधव राज सिंधिया भी पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक थे 30 सितंबर 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधव राज सिंधिया के उत्तर प्रदेश में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी वह मध्य प्रदेश की गुना सीट से सांसद थे 1971 से होने वाला कोई भी चुनाव वह नहीं आ रहे थे वह गुना से 9 बार सांसद चुने गए थे 1971 में उन्होंने जन संघ के टिकट पर चुनाव लड़ा था इसके बाद इमरजेंसी के बाद 1977 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता

2001 में पिता माधवराव सिंधिया की मृत्यु के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और इसके अगले साल वह गुना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और वह भारी बहुमत के साथ जीते 2002 की जीत के बाद वे 2004,2009 और 2014 में भी सांसद निर्वाचित हुए मगर 2019 में वह अपने ही निजी पूर्व सचिव से हार गए राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हुए इस हार से काफी व्यथित हुए थे

सिंधिया परिवार मध्यप्रदेश के शाही ग्वालियर घराने से आता है उनके दादा जीवाजी राव सिंधिया इस घराने के अंतिम राजा थे ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व  वाली यूपीए सरकारओं में 2004 से 2014 में मंत्री रहे 2004 में उन्हें संचार और सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया 2009 में उन्हें वाणिज्य राज्यमंत्री बनाया गया और 2014 में वह ऊर्जा मंत्री बने उनकी छवि एक ऐसे मंत्री में से थी जो सख्त फैसले लेता था वह यूपीए सरकार में एक युवा चेहरा भी थे ज्योतिरादित्य सिंधिया देश के सबसे अमीर नेताओं में से गिने जाते हैं जिनकी संपत्ति 25000 करोड रुपए आंकी जाती है जो उन्हें विरासत में मिली है उन्होंने इस संपत्ति का उपयोग कानूनी अधिकार बताया है जिन्हें परिवार के दूसरे सदस्यों ने अदालत में चुनौती दी है 2012 में ज्योतिरादित्य सिंधिया एक विवाद में फंसे जब वह ऊर्जा मंत्री थे पावर ठप हो जाने के कारण देश में बिजली की आपूर्ति खत्म हो गई पूरे देश में बिजली व्यवस्था चरमरा ने से यूपीए सरकार की छोटी से छोटी पार्टी ने आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई जाने लगी

क्रिकेट के शौकीन ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष भी है वह देश के क्रिकेट संघ को लेकर ना खुश रहे हैं और खासकर स्पॉट फिक्सिंग को लेकर वह अपने आपत्ति दर्ज की थी उनकी आपत्ति के बाद संजय जगदाले को क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सचिव पद से हटना पड़ा था साल 2014 में जब पूरे देश में मोदी लहर की चर्चा हो रही थी उस वक्त कांग्रेस की कुछ ही नेता लोकसभा चुनाव जीते थे. उनमें से एक थे ज्योतिरादित्य सिंधिया जो गुना की सीट से जीते थे लेकिन लगातार चुनाव प्रसार के बाद भी 2019 में वह गुना की सीट से हार गए थे उनके मुकाबले बीजेपी की सीट पर कृष्णपाल सिंह खड़े थे जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव भी रह चुके हैं मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान हुई रैलियों में राहुल गांधी और कमलनाथ का भी साथ मिला था जहां राहुल गांधी ने कमलनाथ को अनुभवी नेता बताया था वही ज्योतिरादित्य सिंधिया को भविष्य का नेता बताया था जानकार मानते हैं कि चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे लेकिन उनकी महत्त्वकांक्षा बहुत बड़ी थी वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस आलाकमान ने उनकी बात मान ली थी और उनसे कांग्रेस के आधे से अधिक विधायक का समर्थन हासिल करने के लिए कहा गया था lekin वह केवल 23 विधायकों का समर्थन ही साबित कर सके, जिसके बाद प्रदेश का मुख्यमंत्री कमलनाथ को बनाया गया कांग्रेस के राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कई मौकों पर नजदीकियां दिखाई दी गई थी 2014 में कांग्रेस की करारी हार के बाद दोनों नेता कई बार साथ दिखे लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ उनके रिश्ते इतने मधुर नहीं रहे मैं पहले भी राज्य में सरकार के कामकाज से नाराजगी जता चुके हैं

कई बार ऐसे मौके भी आए जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कमलनाथ के खिलाफ सामने दिखे, टीकमगढ़ में एक रैली को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- सरकार अपने मेनिफेस्टो के वादे और किसान कर्ज के वादे को पूरा नहीं करती है तो वे सड़कों पर उतरेंगे और इसका उत्तर देते हुए कमलनाथ ने कहा था कि तो वह उतर जाएं
राज्य सरकार में पार्टियों के बीच मतभेद को कांग्रेस आलाकमान ने नजरअंदाज किया बताया जा रहा है कि 9 मार्च को ही ज्योतिराज सिंधिया ने अपना इस्तीफा दे दिया था और नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ कि मिलने के बाद 10 मार्च को यह इस्तीफा सार्वजनिक किया गया क्योंकि इस्तीफे पर भी 9 मार्च की तारीख लिखी गई है हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया इससे पहले  दावा करते रहे हैं पार्टी के बीच सब कुछ ठीक ठाक है और बातचीत से मामला सुलझा लिया जाएगा लेकिन उनकी करीबी महेंद्र सिंह सिसोदिया के बयान ने साफ कर दिया था  कि पार्टी के भीतर कलह की जड़ें कितनी गहरी है महेंद्र सिंह ने कहा था कि सरकार गिराई नहीं जाएगी लेकिन जिस दिन हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को नजरअंदाज किया गया उस दिन आपके बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

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