मरकज का बड़ा बयान, डीएम से लेकर एसीपी तक को थी खबर!

मरकज का बड़ा बयान, डीएम से लेकर एसीपी तक को थी खबर!

दिल्ली का हजरत निजामुद्दीन इलाका इस समय सुर्खियों पर है वजह यहां मरकज में एक साथ रह रहे कुल 133 लोगों को यहां से निकालकर इलाज के लिए अस्पतालों में भेजा गया है इनमें 24 corona पॉजिटिव है तो 333 संदिग्ध है इसी बीच मरकज के बयान के बाद अधिकारियों की ढिलाई सामने आई है

मरकज के लोगों ने पूरे मामले में क्या कहा

मरकज की ओर से प्रेस स्टेटमेंट जारी किया गया है वहां के लोगों की ओर से दिए गए बयानों की माने तो उनकी स्थिति के बारे में डीएम से लेकर एसीपी तक को सबको पता था फिर भी corona महामारी को देखते हुए इन सभी लोगों को यहां से निकालने का काम युद्ध स्तर पर तब नहीं हुआ ना ही दिल्ली सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय या गृह मंत्रालय को इस स्थिति से अवगत कराया गया

मरकज से जुड़े लोगों का कहना है कि डीएम तक जानते थे कि विदेशी भी इस मरकज में ठहरे हुए हैं वह लौट नहीं सकतें थे लेकिन इस भीड़ को अलग करने के लिए शासन की ओर से ठोस कदम उठाए जा सकते थे यह कदम पहले उठाए जाते तो मरकज में रह रहे लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता था
आपको बता दें कि मरकज में 1 से 15 मार्च तक तबलीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए आए 2000 से ज्यादा लोग पहुंचे थे इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और विदेश के कुल 2000 लोग मरकज में शामिल हुए थे वहीं दिल्ली के शहरों के आसपास के लोग भी इसमें शामिल थे चारों ओर से कुरौना संक्रमण फैलाने की निंदा झेल रहे तबलीगी जमात की ओर अब प्रेस स्टेटमेंट जारी कर दिया गया है इसमें कहा गया-

 कि जब देश में जनता कर्फ्यू कानून का ऐलान हुआ उस समय बहुत सारे लोग मरकज में रह रहे थे 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया उसी दिन से मरकज की गतिविधियों को बंद कर दिया गया था किसी भी बाहरी आदमी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था बल्कि यहां जो लोग रह रहे थे उनके जाने का इंतजाम किया जा रहा था इससे पहले 21 मार्च से रेल सेवाएं बंद हो गई थी इसीलिए बाहर के लोगों को भेजना मुश्किल हो गया जो आसपास इलाके के लोग थे उन्हें सबसे पहले घर भेजा गया इस तरह से चंदा कर्फ्यू ऐलान के बाद ही 1500 लोग अपने घरों के लिए रवाना हो गए थे लेकिन 1000 लोग मरकज में ही रह गए क्योंकि उनके राज्यों तक जाने का कोई भी साधन नहीं था

मरकज के इस प्रेस स्टेटमेंट में बताया गया कि जनता कर्फ्यू के साथ साथ 22 मार्च से 31 मार्च तक के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने lockdown का ऐलान किया इस वजह से परिवहन के सभी रास्ते बंद हो गए और lockdown के तहत मरकज के बाहर लोग नहीं निकले. इसके बाद 24 मार्च को अचानक निजामुद्दीन के SHO ने मरकज प्रशासन को धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए नोटिस भेजा मरकज की ओर से उसी दिन जवाब में बताया गया कि मरकज को बंद कर दिया गया है यहां 1000 लोग ठहरे हैं जिन्हें भेजना मुश्किल हो गया है इनमें विदेशी नागरिकों की सूचना भी SHO को दे दी गई

मरकज की ओर से बताया गया कि हमने प्राइवेट गाड़ियों के लिए कर्फ्यू 'पास' मांगा ताकि  लोगों को घर भेजा जा सके आपको बता दें कि यह 'pass' अब तक जारी नहीं हुए इसके बाद मरकज में एक मेडिकल टीम पहुंची जिनमें सभी लोगों की जांच की 26 मार्च को मरकज के प्रशासन से लोगों को SDM कार्यालय बुलाया गया यहां पर डीएम को फंसे हुए लोगों की जानकारी दी बाद में यहां से लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया

वहीं 27 मार्च को 6 लोगों की तबीयत खराब होने की वजह से मेडिकल जांच करवाई गई 28 मार्च को एसडीएम और who टीम ने आकर 33 लोगों की जांच की जिन्हें राजीव गांधी अस्पताल में रखा गया, बाद में 28 मार्च को लाजपत नगर एसपी की ओर से lockdown उलंघन करने का नोटिस आया इसका जवाब मरकज की ओर से दिया गया और लगातार प्रशासन को जानकारी देने के बाद भी 30 मार्च को अचानक सोशल मीडिया में यह खबर फैल गई कि corona कि मरीजों को मरकज में रखा गया है और पुलिस की टीम वहां रेड कर रही है यह मरकज के लोगों के लिए चौंकाने वाली बात थी लोगों का कहना है कि जब हम डीएम से मिलकर सारे हालात बता चुके हैं पुलिस से लगातार संपर्क में थे लोगों को लौटाने की मांग भी हमने की, इस पर कार्रवाई करने की वजह दिल्ली सरकार ने मरकज पर ही केस करने का आदेश जारी कर दिया

प्रशासन को सरकार तक मरकज की ओर से दिए गए खत नोटिस के जवाब, वाहनों के लिए पास दिए जाने की पहुंच आनी चाहिए थी ताकि सरकार उसी समय उचित कार्यवाही की जाती

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