क्या Telecom कंपनियों का सफर यहीं तक रहा jio,Airtel,vodafone-idea.

क्या Telecom कंपनियों का सफर यहीं तक रहा jio,Airtel,vodafone-idea.

अब Telecom कंपनियों का क्या होगा!

देश की telecom कंपनियों की हालत खराब है लगातार कंपनियों की घाटे में जाने की बात कही जा रही है Vodafone-idea की तो देश से कारोबार समेटने तक की बात कही जा रही है साथ ही पिछले साल 24 अक्टूबर 2019 को Airtel, vodafone-idea और रिलायंस समेत बाकी telecom कंपनियों को बड़ा झटका लगा दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इन टेलीकॉम कंपनियों को सरकार की बकाया अर्जेस्ट ग्रॉस रिवेन्यू रकम को चुकाने का आदेश दिया और इसके साथ ही 23 जनवरी 2020 तक की डेडलाइन भी तय कर दी थी और अब यह डेडलाइन खत्म हो गई है लेकिन अभी तक Airtel,Vodafone-idea ने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है वही मुकेश अंबानी की रिलायंस jio ने 195 करोड़ रुपए का AGR भुगतान कर दिया है

अब Telecom कंपनियों का क्या होगा!

बकाया का भुगतान नहीं करने वाली telecom कंपनियों को सरकार की तरफ से मामूली राहत मिली है दरअसल telecom डिपार्टमेंट ने इन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करने का फैसला लिया है, डिपार्टमेंट ने telecom कंपनियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को डेडलाइन की तारीख बढ़ाने का फैसला लिया है

आपको बता दें कि भारती Airtel और vodafone-idea नेट डिपार्टमेंट को टेलीकॉम पत्र भेजकर कहां था कि वह 88,624 करोड़ रुपए का AGR भुगतान तय समय सीमा पर नहीं कर पाएगी, कंपनियां इस भुगतान के लिए समय सीमा बढ़ाने की दायर याचिका का सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करेगी

दरअसल पिछले मंगलवार में टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी इस मामले की अगले हफ्ते सुनवाई होनी है इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के AGR भुगतान के विचार करने फैसले पर भी याचिका दायर की थी लेकिन इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था

इसी बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा oil india और पावर ग्रिड जैसी non-telecom कंपनियों को AGR भुगतान को लेकर कोई बकाया नहीं बनता है धर्मेंद्र प्रधान ने इसे गलतफहमी कहा!

दरअसल टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने गेल इंडिया से 1.72 लाख करोड़ रुपए,oil india से 48,000 करोड रुपए, पावर ग्रिड से 40,000 करोड़ रुपए और बाकी कंपनियों से भुगतान करने के लिए कहा है

वहीं इन कंपनियों ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट से नोटिस मिलने के बाद सुप्रीम cort मैं स्पष्टीकरण दिए जाने पर याचिका दायर की है आपको बता दें telecom कंपनियों और सरकार के बीच और अर्जेस्ट ग्रॉस रिवेन्यू (AGR) का विवाद 14 साल पुराना है telecom कंपनियों के जरिए डिपार्टमेंट of telecom को दी जाने वाली यूजर्स और लाइसेंस फीस को AGR कहते हैं

अब देखना ये होगा कि सुप्रीम कोर्ट टेलीकॉम कंपनियों के दायर याचिका पर क्या फैसला लेता है

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