COP25: WWF and Prado Museum use art to show climate change क्या वर्ल्ड के 200 देश climate change संकट का निवारण निकाल पाएंगे?

COP25: WWF and Prado Museum use art to show climate change क्या वर्ल्ड के 200 देश climate change संकट का निवारण निकाल पाएंगे?

COP25: WWF and Prado Museum use art to show climate change


 आज हम बात करेंगे जलवायु परिवर्तन जो भारत समेत पूरी दुनिया पर एक संकट की तरह छा रहा है धरती का तापमान बढ़ रहा है ग्लेशियर पिघल रहे हैं हवा दम घोट रही है और असर खेती किसानी पर भी पड़ रहा है ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने एक सम्मेलन कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टी यानी cop25 बुलाया है जिसमें दुनियाभर के नेता जानकार जलवायु परिवर्तन पर निपटने के तरीके की खोजने की कोशिश करेंगे



इस सम्मेलन में 200 देशों के करीब 29000 लोग शिरकत करेंगे पहले यह सम्मेलन चिली में होना था लेकिन वहां राजनीतिक स्थिरता के कारण जिम्मेदारी स्पेन को सौंपी गई जलवायु संकट के बीच नेताओं और राज नायको के मिलने का समय शुरू हो गया है यह बातचीत तो हफ्ते चलेगी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सम्मेलन के पहले का यहां से लौटना मुमकिन नहीं है उन्होंने कहा जलवायु संकट सामने है और इस राज नायकों को इसका समाधान ढूंढना ही पड़ेगा

सेव द चिल्ड्रन का कहना है कि जलवायु के झटकों के कारण अफ्रीका में लाखों लोग भूख से लड़ रहे हैं संगठन का कहना है कि तूफान और सूखे की चपेट में आकर तकरीबन 3 करोड़ 30 लाख नो ने की आपात स्थिति से गुजर रहे हैं

क्या होगा सम्मेलन में



ऑस्ट्रेलिया में लगी जंगलों में आग से लेकर वेनिस की बाढ़ और कर्मियों के दौरान रिकॉर्ड तोड़ने वाले टेंपरेचर तक. यह पूरा साल आपदाओं के अति के नाम रहा वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि इसी तरह ताप बढ़ता रहा तो आने वाले दिन और भी भयावह हो सकते हैं यहां मैट्रिक मैं धरती के भविष्य पर गहन चिंतन हो रहा है संयुक्त राष्ट्र पहले ही कह चुका है कि जलवायु के भयानक संकट को रोकने के लिए हमें वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री से ऊपर बढ़ने को रोकने के लिए कोशिश करनी चाहिए. इसके लिए हमें अपने जीने के जीवन तरीकों को बदलना होगा फॉसिल फ्यूल की जगह रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करना होगा इलेक्ट्रिक कारें उपयोग करने पड़ेगी और अपने घरों को उर्जा जरूरतों के मुताबिक बनाना होगा

16 वर्ष की ग्रेटा चर्चा में हिस्सा लेने जा रही है उन्होंने जलवायु को लेकर एक वैश्विक अभियान शुरू किया जिसमें लाखों युवा सड़कों पर उतर आए! उनका कहना है कि दुनिया को जलवायु के मुद्दे पर अभी से अभी कदम उठाना चाहिए क्योंकि यहां उनका भविष्य दांव पर लगा है

जलवायु परिवर्तन में प्रदूषण बड़ा हाथ है चेन्नई का मशहूर मरीना बीच जो कभी अपनी खूबसूरती यों के लिए सुर्खियों में रहा करता था पिछले 2 दिनों से समुंदर की लहरें अपने साथ इस तट पर अपने साथ झाग लेकर आ रही हैं आज सुबह बीच झाग से पूरी तरह ढका नजर आया इसके साथ झाग की दुर्गंध भी काफी परेशान करने लायक है मरीना बीच के पास रहने वाले मछुआरों के मुताबिक यह छाप फैक्ट्रियों और अस्पतालों के कचड़ा सीधे समुद्र में बहा देने से बना है!

Climate change के कारण जिंबाब्वे पर महा संकट




Climate change का ही असर है कि कहीं सूखा पड़ रहा है तो कहीं बाढ़ जिंबाब्वे के कई हिस्सों में लंबे समय से सूखे से प्रभावित हैं और इसका जनजीवन पर बहुत ही बुरा असर पड़ा है यह सूखा जानलेवा है बीते दो महीनों के दौरान 200 हाथी भूख के कारण दम तोड़ चुके हैं सोलर पंप की मदद से जल चित्रों को सूखने से बचाने की कोशिश की जा रही है लेकिन सूखे के स्थितियों के बीच हाथियों के लिए गंभीर संकट है

जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता है पेड़ नष्ट हो रहे हैं जमीन सूख रही है ग्लेशियर पिघल रहे हैं सब्जियां नष्ट हो रही है यह एक बहुत ही बड़ा मुद्दा है पार्क की सरहदों के बीच किसान भी जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं उनकी जमीन सूख चुकी है जलवायु परिवर्तन ने इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष बढ़ा दिया है

लंबा खींचता जाता सूखा शहरों के लिए भी संकट है हरारे के बारे में करीब 5 नाक लोग यह जगह पर्यावरण संकट के मुकाबले के लिए नहीं है महीनों से यहां पाइप के द्वारा पानी नहीं आया है हैजा और टाइफाइड का खतरा बना रहता है रात के समय जिंबाब्वे की स्थिति और भी खराब हो जाती है हाइड्रोपावर की कमी की वजह से जिंबॉब्वे की पावर सप्लाई प्रभावित हुई है

 जिंबॉब्वे वर्षों से कुशासन और बदहाली झेल रहा है सूखे की वजह से संकट से निकलने का रास्ता और भी मुश्किल हो गया है जिंबंबे का आज डरावना है और आने वाला कल और भी खराब हो सकता है

Climate change आने वाले समय में और एक बड़ी समस्या हो जाएगी यह केवल जिंबॉब्वे ही नहीं पूरे विश्व के लिए बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन हो रहा है जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे पृथ्वी का टेंपरेचर बढ़ रहा है जमीन सूख रही है ग्लेशियर पिघल रही है जिससे आने वाले समय में मानव जाति के लिए अपना भविष्य बचाने का खतरा बढ़ रहा है इन सब से निवारण पाने के लिए जल्द से जल्द कोई उचित कदम उठाना होगा पूरे विश्व को जिससे मानव जाति का अस्तित्व इस धरती पर बना रहे



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