कैसी रही है Maharashtra के New Chief Minister uddhav thackeray की जिंदगी?

कैसी रही है Maharashtra के New Chief Minister uddhav thackeray की जिंदगी?

कैसी रही है Maharashtra के New Chief Minister uddhav thackeray की जिंदगी? 

Shiv sena के uddhav thackeray Maharashtra में लंबे समय तक उठापटक हुई चुनाव परिणाम आने के बाद shiv sena ने शुरुआत में ही तय कर दिया की चूंकि उनकी भूमि का पार्टी  के मुख्यमंत्री को तय करने में है इसलिए मुख्यमंत्री का पद उन्हें दिया जाए
इस बात पर BJP और Shiv sena में लंबी बातें चली! सरकार नहीं बनी और लग गया राष्ट्रपति शासन अचानक से राष्ट्रपति शासन खत्म भी हो गया और देवेंद्र फडणवीस बन गए मुख्यमंत्री अचानक से हो गया इस्तीफा और Shiv Sena को मिला मौका और राष्ट्रपति कांग्रेस पार्टी व कांग्रेस पार्टी का साथ मामला हो गया fit!



कौन है udhav thakre

Udhav thakre की पहचान शिवसेना नेता होने से भी ज्यादा है और अलग है uddhav thackeray का जन्म 27 जुलाई 1960 में हुआ बाल ठाकरे के सबसे छोटे बेटे हैं uddhav thackeray बाला साहब ठाकरे के 3 बेटे थे बड़ा बेटा बिंदुमाधव ठाकरे और उससे छोटे जयदेव ठाकरे फिर  उद्धव ठाकरे तीनों भाइयों में उद्धव ठाकरे सबसे शांत सबसे चुप uddhav thackeray जी के शुरुआती पढ़ाई बालमोहन विद्यामंदिर से शुरू हुई आगे चलकर Raj thakre ने uddhav thackeray के चचेरे भाई ने भी इसी School में दाखिला लिया

बालमोहन विद्यामंदिर से पढ़ाई के बाद uddhav thackeray ने दाखिला लिया जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में यहां से पढ़ाई हुई और कलाओं में खासकर फोटोग्राफी में झुकाव शुरू हो गया ऐसा झुकाव कि उद्धव ठाकरे मुंबई की हवाई तस्वीरें खींची और प्रदर्शनी लगी जहांगीर आर्ट गैलरी में यह फोटोग्राफी का शौक ऐसा कि uddhav thackarey ने 2010 में महाराष्ट्र देश और 2011 में बहावा विट्ठल नाम से दो फोटोग्राफी की किताबें भी छाप दी


Maa की इच्छा से हुई राजनीति में entry

लेकिन अपने सुझाव रुझानों के बावजूद shiv sena को चलाने और राजनीति में दखल देने की नहीं थी साल आया 1994 धीरे-धीरे uddhav thackarey की राजनीति में इंट्री होने लगी राजनीति में दिलचस्पी ना लेने के बावजूद भी आना पड़ा क्योंकि मां की इच्छा थी चाहती थी कि उनका एक बेटा तो कम से कम Bala साहब ठाकरे जी का साथ दें  मंजिलें बेटे जयदेव से बाल ठाकरे जी की खटपट थी मां ने सबसे पहले इच्छा udhav thackre से 1994 में जताई और कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों में जाया करो uddhav ने मां की आज्ञा का पालन किया पहली बार किसी कार्यक्रम में दिखे विधानसभा चुनाव का माहौल बना हुआ था Raj thackre के नेतृत्व में भारतीय विद्यार्थी सेना ने नागपुर में एक मोर्चा निकाला इसमें उद्धव ठाकरे जी पहुंचे बड़े शांति से लोगों को नहीं पता था कि यह तूफान से पहले की शांति है और राज ठाकरे साइड लाइन होने लगे

Uddhav के shiv sena में आने से Raj thackre साइड होने लगे एकाद साल में उद्धव को भी समझ में आ गया कि पार्टी में जमने का यही सही time है इस वक्त उद्धव ठाकरे पार्टी के अंदरूनी कामों को करने में हाथ बंटाने लगे बाल ठाकरे भी कई कामों के लिए कार्यकर्ताओं को uddhav thackre के पास भेजने लगे लोगों ने भी उद्धव ठाकरे का बुलाना शुरू कर दिया uddhav ने पहला दाव 1997 में बीएमसी चुनाव में

Ticket बंटवारे में uddhav thackre की मनमानी हुई Raj thackre कुछ साइड में चले गए उनके कई कार्यकर्ताओं के टिकट काट दिए गए Raj thackre इतना नाराज हुए कि वह media के सामने तक बोल गए कि हां मैं नाराज हूं Raj thackre ने इस बात के लिए बाल ठाकरे से डांट भी सुनी खबरें छपी की बाल ठाकरे ने कहा कि अंदर की बात अंदर ही रहनी चाहिए

Uddhav धीरे-धीरे महाराष्ट्र की राजनीति समझ चुके थे और शिव सेना पर पूरा पक्ष मजबूत कर लिया था 2002 के बीएमसी चुनाव आए यहां पर भी 1997 का एपिसोड दोहराया गया इस बार ticket बांटने में उद्धव की मनमानी खूब चली इस बार भी राज ठाकरे के कई लोगों की टिकट काट दिए गए जिससे राज ठाकरे और भी नाराज हो गए और पार्टी के अंदर कई खेमे बन गए अब उद्धव ठाकरे राजनीति में खुलकर सामने आ चुके थे



भाभी भाई और पूर्व मुख्यमंत्री को किनारे कर के आगे बढ़े उद्धव ठाकरे


Shiv sena के बाल ठाकरे उचित व्यक्ति की तलाश कर रहे थे जो शिवसेना को संभाल सके लेकिन मीडिया को लगता था कि शिवसेना का राज ठाकरे ही बारिश है स्मिता ठाकरे और राज ठाकरे के अलावा भी शिवसेना में एक और आदमी ने अपनी भूमिका बनाई हुई थी नाम था नारायण राणे शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं में एक मनोहर जोशी के इस्तीफा देने के बाद साडे 8 महीनों के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे बाल ठाकरे के पसंदीदा नेताओं में से एक थे तो जब यह समय था कि स्मिता ठाकरे राज ठाकरे व नारायण राणे शिवसेना को आगे लेकर चल रहे थे और यह भी वही समय था जब इन तीनों को शिवसेना से बाहर जाने का समय आ चुका था

साल 2003 महाबलेश्वर में पार्टी का अधिवेशन हुआ यह तय होना था कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा बैठक शुरू हुई एक प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया उद्धव ठाकरे के नाम पर यह प्रस्ताव लाए थे खुद राज ठाकरे वही raj thackre जो खुद इस पद के सबसे बड़े दावेदार माने जाते थे बाल ठाकरे के उत्तराधिकारी माने जाते थे जनता चौक गई यह कैसे हुआ लेकिन हुआ तो हुआ उद्धव ठाकरे के नाम पर सर्वसम्मति मुहर लग गई uddhav शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष बन गए बाद में एक इंटरव्यू में raj thackre मैं बोला भी था कि यह मेरी जिंदगी का सबसे खराब फैसला था अब उद्धव ठाकरे राज ठाकरे स्मिता ठाकरे व नारायण राणे से ऊपर जाकर फैसला लेने लगे कहां जाता है कि कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पहले ही उद्धव ठाकरे ने Raj thackre और नारायण राणे को साइडलाइन करना शुरू कर दिया था

Raj thackre नासिक और पुणे 2 बड़े शहरों में शिवसेना का काम देख रहे थे वहां हो रही कार्यवाही के प्रति जवाबदेही थे shiv sena का नया नया हालचाल ले रहे उद्धव ठाकरे ने बिना Raj thackre को लिए हुए नासिक व पुणे के बड़े-बड़े नेताओं को लेकर मीटिंग शुरू कर दी ऐसा खबरें बताती हैं राज ठाकरे को यह नागवार गुजरी लेकिन चुप रहे

साल 2004 स्मिता ठाकरे और जयदेव ठाकरे का तलाक हो गया लेकिन स्मिता ने मातोश्री छोड़ने को इनकार कर दिया बाद में खबर छपी कि मातोश्री से उन्हें बाहर निकाल दिया गया फिर साल 2005 नारायण राणे शिवसेना से बाहर कर दिए गए उद्धव ठाकरे से तो अनबन चल ही रही थी अब सिर्फ बचे राज ठाकरे अब साल आता है 2006 अपने सीमेंट ते हुए अधिकारों को राज ठाकरे देख रहे थे shiv sena मैं उद्धव ठाकरे की पकड़ मजबूत होते हुए भी उनके साथ के नेता साइडलाइन किए जा रहे थे Raj ठाकरे खुद भी साइड लाइन किए जा रहे थे

साल 2006 में raj thackre ने पार्टी छोड़ दी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया 3 साल के दरमियान शिवसेना के 3 बड़े नेता बाहर हो गए और बच गए उद्धव ठाकरे



Uddhav thackre का सबसे खराब टाइम


Raj thackre के जाने और तमाम चुनौतियों के बाद भी शिवसेना ने चुनाव जीत लिए 2007 में हुए बीएमसी के चुनाव जीत लिए uddhav कि फिर जय-जय हुई सब को लगने लगा कि Raj thackre का अब कैरियर खत्म हो जाएगा मगर 2008 में राज ने यूपी बिहारी बनाम मराठी का आंदोलन छेड़ दिया उनकी दुकान चल पड़ी 2009 में राज की पार्टी मनसे ने 13 विधानसभा सीटें जीत ली shiv sena ने अपने इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन किया 45 सीटें पिछले बार के चुनाव का 17 सीटों का नुकसान नेता विपक्ष का पद भी खो दिया और यह पद मिल गया Bjp को जिसके हाथ में शिवसेना से एक सीट अधिक आई थी तो कुल मिलाकर उद्धव का सबसे खराब टाइम चल रहा था उनके हाइट का भी ऑपरेशन हुआ फिर साल 2010 से 11 का समय आया शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे की तबीयत खराब होने लगी बाल ठाकरे उद्धव ठाकरे को बड़ी उम्मीद से देख रहे फिर 2012 में बालासाहेब ठाकरे जी का भी निधन हो गया लगा कि उद्धव ठाकरे के लिए आगे की राह आसान नहीं है


 लेकिन 2013 का अंत आते-आते देश में मोदी की बात होने लगी थी उद्धव ने हवा का रुख भौंक लिया उन्होंने bjp के साथ दोस्ती कर ली 2014 में शिवसेना को इसका फायदा भी मिला शिवसेना ने अपने इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें जीती मगर नरेंद्र मोदी तो नरेंद्र मोदी थे उनको पता किया कि उन्हें की लहर के कारण शिवसेना ने कितनी सीटें जीती हैं लेकिन उद्धव ठाकरे ने इससे बाहर निकलने का फैसला लिया 2018 में एक बड़ा फैसला लिया दिसंबर में चले गए अयोध्या शिवसैनिकों की भीड़ के साथ भारत के कई हिस्सों से शिवसैनिक पहुंचे उनके साथ अयोध्या कहा गया कि उद्धव अब एक राष्ट्रीय स्तर की नेतागिरी करने के लिए तैयारी कर रहे हैं अब साल है 2019 शिवसेना ने 5 साल में बड़ा राजनीति फेरबदल कर लिया
 अब भाजपा से अलग किंग मेकर की भूमिका में आई है शिवसेना और कहा भी कि King भी हमारा ही होगा


Post a Comment

0 Comments