India के आगे झुका चीन News bulletin

India के आगे झुका चीन News bulletin

भारत के आगे चीन झुका News bulletin

थाईलैंड में 1 से 4 नवंबर तक आसियान सम्मिट चली इस समिट में भारत चीन ऑस्ट्रेलिया थाईलैंड साउथ कोरिया और जापान सहित 10 आसियान सदस्य देशों ने शिरकत की थी



इस सम्मिट में बहुत से मुद्दों पर बात हुई लेकिन जो एक मुद्दा सबसे ज्यादा प्रकाशित में आया वह मुद्दा था RCEP का क्यों यह मुद्दा इतना ध्यान खींच रहा था लोगों का क्योंकि भारत में इस मुद्दे में शामिल होने से इनकार कर दिया भारत की ओर से उठाया गया यह कदम बिल्कुल सही था लेकिन सम्मिट में कुछ  लोगो को यह कदम सही नहीं लगा खासकर कि चीन को लेकिन अब चीन झुकने को तैयार अपना रुख नरम करते हुए चीन ने मंगलवार को कहा वह भारत से सुलह की बातचीत करेगा

 सोचने वाली बात यह है कि चीन भारत के आगे नरम क्यों पड़ रहा है दरअसल भारत का उठाया गया यह कदम अपने देशवासियों और देश के लिए था लेकिन चीन की आंखों में भारत का यह कदम इसलिए खटक रहा था कि उसका तैयार माल अमेरिकी
ट्रेड वॉर की वजह से बिक नहीं रहा trade वॉर की वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई चीन भारत व अन्य देशों के बाजार से अपने माल को बेचकर करना चाहता है



आपको बता दें की RCEP ट्रेड एग्रीमेंट है जो सदस्यों
 को आपस में एक साथ व्यापार में सहूलियत देता है इसके तहत सामानों में लगने वाला टैक्स नहीं भरना पड़ता या फिर यह टेक्स ना के बराबर होता है

RCEP कि मौजूदा एग्रीमेंट होने से क्या होता

1. भारत को चीन से आने वाले करीब 80% उत्पादों पर टैक्स हटाना पड़ता या फिर कम करना पड़ता इसके अलावा आसियान देशों से आयात किए जाने वाले करीब 90% उत्पादों पर टैरिफ कम करनी पड़ती

2. चीन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयात होने वाले करीब 74% आइटम की टैरिफ हटानी पड़ती

3. भारत का 2018-19 मैं RECP के 11 देशों में व्यापार में घाटा रहा है
लिहाजा RCEP के तहत भारत को इसका समझौता अर्थव्यवस्था के अनुसार नुकसानदायक है इसका सबसे ज्यादा फायदा चीन जैसी इकॉनमी को होता लेकिन भारत को केवल नुकसान उठाना पड़ता



अब आप सभी को यह समझाते हैं कि इसमें भारत की मांग क्या थी

भारत की मांग थी कि RCEP समझौते में चीन की प्रधानता नहीं होनी चाहिए 

2. भारतीय किसान ,व्यापारी, प्रोफेशनल और उद्योगों की भी बराबर भागीदारी होनी चाहिए


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