अयोध्या की जमीन का पूरा सच यह है Ayodhya

अयोध्या की जमीन का पूरा सच यह है Ayodhya

अयोध्या की जमीन का पूरा सच यह है Ayodhya 

9 नवंबर 2019 सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन के मालिकाना हक पर फैसला सुना दिया है विवादित जमीन पर रामलला को मालिकाना माना गया है कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार को मुस्लिम पक्ष के लिए 5 एकड़ जमीन कि कहीं और व्यवस्था करने का आदेश दिया 6 अगस्त 2019 सुप्रीम कोर्ट रोजाना सुनवाई कर रहा था 16 अक्टूबर 2019 को सुनवाई पूरी हुई और फैसला अब हमारे और आपके सामने हैं



लेकिन जो यह 2.77 एकड़ का मामला है यह प्रकाश में या खबरों में 2010 से चला रहा है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पर निर्णय दिया और 2.77 एकड़ को तीनों पक्षों के लिए बराबर बराबर बांट दिया

लेकिन यह 2.77 एकड़ की चर्चा शुरू कैसे होती है और क्यों जानने के लिए चलते हैं 30 नवंबर 1991 इंडिया टुडे मैगजीन ने हिंदू डिवाइडेड फैमिली शीर्षक से कवरस्टोरी छापी थी दिलीप अवस्थी
और शहनाज केसरिया अय्यर में इसमें भाजपा विहिप तथा दूसरे हिंदूवादी दलों के बीच पनपे मतभेद के बारे में लिखा था स्टोरी
18 अक्टूबर 1991 से शुरू करते हुए उन्होंने लिखा है कि कल्याण सिंह उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे उन्होंने एक नोटिफिकेशन जारी किया नोटिफिकेशन में 2.77 एकड़ की जमीन को अधिग्रहीत करने की बात कही यह जमीन की बाबरी मस्जिद परिसर की यानी इस पूरे कंपाउंड में बाबरी मस्जिद का भवन स्थित था



कल्याण सिंह को यह लगता था शायद ऐसा कहा जाता है कि जमीन को स्क्वेयर करके वह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को कुछ दिनों के लिए शांत कर सकते हैं दोनों ही दल कल्याण सिंह के यूपी सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए भयानक दबाव बना रहे थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं विहिप की योजना थी कि 40 दिन तक बजरंग महायज्ञ किया जाए विहिप इससे एक कदम आगे बढ़ गया महायज्ञ की योजना ड्रॉप हो गई और बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष और फैजाबाद के सांसद विनय कटियार के नेतृत्व में समर्थक बाबरी मस्जिद परिसर में घुस गए और पांच छोटे छोटे कमरे ध्वस्त कर दिए गए इसमें से कुछ मंदिरे भी थी ऐसा खबरों में लिखा है इसके बाद बजरंग दल नहीं है बात करनी शुरू कर दी कि सरकार ने जमीन मंदिर बनाने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अधिग्रहित किया था यानी कल्याण सिंह की सरकार के बारे में कहा गया मंदिर बन सके इसलिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था



Highcort हाई कोर्ट ने क्या कहा!

सरकार के जमीन अधिग्रहण फैसले के खिलाफ अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी हाईकोर्ट पहुंच गई इलाहाबाद हाईकोर्ट में 25 अक्टूबर 1991 को अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहित करने से रोका तो नहीं लेकिन किसी भी नई स्थाई निर्माण पर रोक लगा दी highcort ले साथ में यह भी कहा कि राज्य सरकार अधिग्रहित जमीन किसी भी पक्ष या समूह को हस्तांतरित यानी ट्रांसफर नहीं कर सकती

सरकार के जमीन अधिग्रहण करने के बाद .73 एकड़ की जमीन में सिमटकर रह गया यानी जिस हिस्से में बाबरी मस्जिद मौजूद थी जो कि पहले 2.77 एकड़ लेकर मौजूद था



गोली कांड की बरसी पर शौर्य दिवस!

यह बजरंग दल और विहिप के लिए झटका था उन्होंने अपने लाइन थोड़ी सी बल्दी हाई कोर्ट का डिसीजन उनको पच नहीं रहा था ऐसा कहा जाता है उन्होंने थोड़ी सी लाइन में बदलाव लाया और उनका मानना था कि मंदिर तो बनेगा ही लेकिन अभी जो लक्ष्य वह रास्ते में आ रही रुकावट को दूर करना है

30 अक्टूबर 1991 विहिप के उपाध्यक्ष आचार्य गिरिराज किशोर राम जन्मभूमि मुक्ति सदस्य के अध्यक्ष महंत और विनय कटियार ने कार्य सेवकों से शौर्य दिवस मनाने की बात कही
मौका था बरसी का किस चीज की बरसी ठीक 1 साल पहले अयोध्या में मुलायम सिंह यादव के आदेश पर पुलिस ने कार्य सेवकों पर गोली चला दी थी इसे कार्य सेवक गोलीकांड कहा जाता है 1991 के गोली कांड पर विनय कटियार की अपील पर कार्य सेवकों को और लाभ बंद किया इसके बाद 500 कार्य सेवकों के दल ने विवादित जमीन से जाने से इंकार कर दिया वह घुसते गए थे विप के नेताओं के आवाहन से लेकिन वह बाहर निकलने से इंकार कर रहे थे उनका कहना था कि यह वही सरकार है जो हमारे दम पर सत्ता पर आई है और यही हमें मसले से दूर रहने के लिए कह रही है

सरकार की नींद तब टूटी जब 31 अक्टूबर को अगले दिन कार्य सेवकों ने एक छोटा सा भगवा ध्वज मस्जिद के गुंबद पर पहरा दिया कार्य सेवकों ने मस्जिद की बाहरी दीवारों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जिसके बाद लगभग 300 कार्य सेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया



1993 में आया अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून!

लगभग साल भर बाद ही 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई इस पूरे मसले में ढिलाई बरतने के आरोप में घिरी नरसिम्हा राव सरकार ने एक कानून बनाया अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून इस कानून के जरिए नरसिम्हा राव सरकार ने 2.77 विवादित जमीन के साथ-साथ आसपास के करीब 67 एकड़ की जमीन को अधिग्रहित कर लिया नरसिम्हा राव सरकार ने कानून के रास्ते एक मंदिर मस्जिद और लाइब्रेरी व म्यूजियम बनाने की बात कही थी नरसिम्हा राव ने इस कानून के जरिए पहले के सारे सिविल मुकदमा खत्म कर दिए मगर उस वक्त हिंदू और मुस्लिम पक्ष के साथ साथ BJP ने भी इस कानून का विरोध किया था

तो वह यह 2.77 एकड़ जमीन की कहानी जिस पर अधिग्रहण व जिस पर कब्जे और मिल्कियत का मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट में गया और आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है



सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया!

सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है सिया वक्त बोर्ड का भी दावा खारिज कर दिया है सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्त बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मुहैया कराने की बात कही
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को सुननी वक्त बोर्ड के लिए 5 एकड़ जमीन अयोध्या में ही मुहैया करानी होगी
उन्होंने जमीन का मालिकाना रामलला मंदिर निर्माण के लिए दिया है और यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंपी है

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 जय हिंद


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